मातृ-शक्ति दिवस पर नारी शक्ति का सम्मान, भव्य रामलीला में ताड़िका-सुबाहु वध का रोमांचक मंचन - चरित्र समाचार

मातृ-शक्ति दिवस पर नारी शक्ति का सम्मान, भव्य रामलीला में ताड़िका-सुबाहु वध का रोमांचक मंचन

  • रामलीला महोत्सव में मातृ-शक्ति का सम्मान, पद्मश्री बसंती बिष्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां सम्मानित

  • आग उगलते ड्रोन और लेजर शो ने बढ़ाया रोमांच, ताड़िका-सुबाहु वध के मंचन से गूंजा गुरु नानक मैदान

  • पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को मिल रहा भव्य स्वरूप, इस वर्ष एक करोड़ दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य

देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन को मातृ-शक्ति दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री लोकगायिका बसंती बिष्ट और विधायक सविता कपूर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं, भगवान श्रीराम की लीला में ताड़िका एवं सुबाहु वध के भव्य मंचन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, लेजर तकनीक और विशेष ध्वनि प्रभावों से सजे आयोजन ने पारंपरिक रामलीला को आकर्षक और भव्य स्वरूप प्रदान किया।

रामलीला के मंचन के दौरान ताड़िका ने अपने साथियों के साथ आग उगलते ड्रोन के साथ प्रवेश किया तो मैदान में मौजूद दर्शक रोमांचित हो उठे। आधुनिक लेजर तकनीक, मनमोहक प्रकाश व्यवस्था और प्रभावशाली ध्वनि संयोजन के माध्यम से ताड़िका वध और सुबाहु वध के दृश्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस अनूठे मेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

पुरानी टिहरी की विरासत को संजोने का प्रयास

समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित कर उसकी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के इतिहास, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से महोत्सव के दूसरे दिन को मातृ-शक्ति दिवस के रूप में समर्पित किया गया, ताकि समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के योगदान को सम्मान दिया जा सके। लोक संस्कृति, कला, खेल, शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियां समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

पिछले वर्ष 82 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंची रामलीला

अभिनव थापर ने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। दर्शकों से मिले अपार स्नेह और समर्थन ने आयोजन को नई पहचान दिलाई। इसी उत्साह से प्रेरित होकर इस वर्ष रामलीला को और अधिक भव्य स्वरूप दिया गया है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक प्रस्तुतियों और आधुनिक लेजर एवं ध्वनि प्रभावों के संगम के साथ इस वर्ष डिजिटल सीधा प्रसारण के माध्यम से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक विरासत, गढ़वाल के गौरवशाली इतिहास और सनातन धर्म की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाना है।

लोक संस्कृति के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अहम

मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि लोक संस्कृति और समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने में मातृ-शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सराहनीय कार्य करते हैं।

विधायक सविता कपूर ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवित रखने में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। रामलीला जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करते हैं और समाज में अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली महिलाएं सम्मानित

मातृ-शक्ति दिवस पर पद्मश्री लोकगायिका बसंती बिष्ट, विधायक सविता कपूर, राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता उन्नति शर्मा, अभिनेत्री इन्द्राणी पांधी, कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी, डॉ. सुमिता प्रभाकर, पार्षद अंजली सिंघल, पत्रकार मीना नेगी, डॉ. अंशिका जैन, अमृता कौशल, सुमित्रा ध्यानी और डॉ. सुमिति काला सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों और समिति के पदाधिकारियों ने महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

25 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव

समिति के अनुसार, महोत्सव के अंतर्गत 8 से 25 अक्टूबर तक भव्य मेले और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा। 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भव्य दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा।

कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर, विधायक सविता कपूर, पद्मश्री बसंती बिष्ट, पार्षद आयुष गुप्ता, सम्मानित महिलाएं, समिति के पदाधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में जीवंत रखने की यह पहल धार्मिक आस्था के साथ गढ़वाल की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृतियों को सहेजने का प्रयास भी है।

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