बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल में हुई वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितायेंः हेमंत द्विवेदी
-कहा-प्रमोद नौटियाल अध्यक्ष के निजी सचिव नहीं बल्कि बीकेटीसी के वैयक्तिक सहायक
देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति पर चढ़ावा दान चोरी प्रकरण को लेकर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाने वाले वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्वयं वर्ष 2014 से 2017 तक बीकेटीसी के अध्यक्ष रहे हैं। 5 वर्ष 4 माह के कार्यकाल के दौरान मंदिर समिति में वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक विसंगतियों तथा मंदिर अधिनियम, 1939 के प्रावधानों के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए थे गढ़वाल आयुक्त द्वारा की गयी जांच में भी बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान में श्री बदरीनाथ धाम में दानराशि की चोरी एवं हेराफेरी के मामले में आरोपित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल उनका निजी सचिव नहीं है बल्कि बीकेटीसी का कर्मचारी है। आरोपी प्रमोद नौटियाल को तत्कालीन अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल में इंटरनेट कार्डिनेटर के पद पर स्थायी नियुक्ति प्रदान की गयी तथा बाद में नियमों के विपरीत उन्हें वैयक्तिक सहायक के पद पर समायोजित किया गया।
बीकेटीसी अभिलेखों के अनुसार प्रमोद नौटियाल की प्रारंभिक अस्थायी नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी। वर्ष 2014 में उन्हें इंटरनेट कोऑर्डिनेटर पद पर स्थायी नियुक्ति दी गई तथा वर्ष 2017 में बिना स्टेनोग्राफर की निर्धारित अर्हता के उन्हें इंटरनेट कोऑर्डिनेटर से वैयक्तिक सहायक के पद पर समायोजित करते हुए 4600 ग्रेड पे का लाभ प्रदान किया गया। हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल में मंदिर समिति में अनेक वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे। इस अवधि में लगभग कतिपय अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्तियाँ निर्धारित प्रक्रिया एवं नियमों के विपरीत की गयी। कई नियुक्तियाँ रिक्त पद उपलब्ध न होने के बावजूद की गयी तथा इनके लिए न तो विज्ञापन जारी किए गए और न ही चयन प्रक्रिया का पालन किया गया।
अधिकांश कर्मचारियों को पहले दैनिक वेतनभोगी आधार पर तथा बाद में वर्षभर के लिए सेवा में रखा गया।उन्होंने कहा कि बिनसर मंदिर निर्माण के लिए लगभग 4.06 करोड़ की स्वीकृति दी गयी। जबकि संबंधित मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं था और इस संबंध में शासन की पूर्व अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई। निर्माण कार्यों एवं सामग्री आपूर्ति के लिए निविदाएँ नियमों के अनुसार दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं की गईं तथा कुछ निविदाएँ सीमित प्रसार वाले समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गयी, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगे। इसी प्रकार, पोखरी स्थित नागनाथ शिव मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विकास कार्यों के लिए लगभग 39 लाख से अधिक की राशि स्वीकृत की गई, जबकि यह मंदिर भी मंदिर समिति के अधीन नहीं था।
हेमंत द्विवेदी ने आरोप लगाया कि टिहरी जनपद में मदन नेगी से गणेश प्रयाग तक सड़क निर्माण के लिए मंदिर समिति की धनराशि का उपयोग किया गया, जिसे समिति के संसाधनों का दुरुपयोग माना गया। इसके अतिरिक्त, श्री गणेश मंदिर, टिहरी में यात्री विश्राम गृह निर्माण के स्थान पर सड़क निर्माण कार्य कराया गया।हेमंत द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2014 में आपदा राहत कोष से प्राप्त राशि में से 12 लाख एक निजी फर्म को डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण के लिए प्रदान किए गए, जबकि उक्त भुगतान के लिए शासन की स्वीकृति एवं निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग ने मामले में न्याय विभाग से परामर्श लिया था। न्याय विभाग ने अपनी राय में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक तथा आपराधिक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में प्राप्त शिकायतों के आधार पर शासन द्वारा मामले की जांच के आदेश दिए गए तथा आयुक्त गढ़वाल द्वारा गठित जांच समिति में प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारियों को शामिल किया गया।बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर मंदिर समिति की छवि धूमिल करने के बजाय सभी पक्षों को पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए, जिससे सत्य सामने आ सके और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।