बांधों से पानी छोड़ने पर प्रभाव भी बताना होगा, मानसून के दौरान बांधों एवं बैराजों से जुड़ी सूचनाओं की होगी रियल टाइम निगरानी

-सभी बांध एवं बैराज प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे यूएसडीएमए को भेजेंगे जलस्तर एवं डिस्चार्ज की रिपोर्ट
-डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में संभावित प्रभाव का पूर्व आकलन किया जाएगा

देहरादून। राज्य के सभी प्रमुख बांधों एवं बैराजों को प्रतिदिन सुबह 8 बजे तथा शाम 8 बजे अपने जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो तथा डिस्चार्ज से संबंधित अद्यतन जानकारी अनिवार्य रूप से यूएसडीएमए को उपलब्ध करानी होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों एवं जल विद्युत परियोजनाओं के अधिकारियों को मानसून के दौरान बेहतर समन्वय तथा निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी बांध अथवा बैराज से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित हो तो इसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा संबंधित जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। सूचना में यह भी उल्लेख किया जाए कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन-किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में नदी के जलस्तर में कितनी वृद्धि होने की संभावना है तथा इससे संभावित प्रभाव क्या होंगे ताकि समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
सचिव श्री सुमन ने सभी परियोजनाओं को निर्देशित किया कि पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत स्थापित नदी जलस्तर सेंसरों एवं डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त आंकड़ों को एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा किया जाए। बैठक में सभी जल विद्युत परियोजनाओं एवं बांध प्रबंधन को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विशेष रूप से टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने के निर्देश दिए ताकि मौसम संबंधी आंकड़े अधिक सटीक एवं व्यापक रूप से उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम बांधों तथा बैराजों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। सभी परियोजनाएं आपस में नियमित रूप से जलस्तर, वर्षा, डिस्चार्ज तथा अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान करें, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-प्रशासन प्रकाश चंद्र ने कहा कि सभी परियोजनाओं में स्थापित डिस्चार्ज सायरन, चेतावनी उपकरणों तथा विभिन्न सेंसरों की नियमित टेस्टिंग की जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर ये पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान तकनीकी उपकरणों की कार्यशीलता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी को तत्काल दूर किया जाए।
संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा ने कहा कि बाढ़ संभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित की जाए। जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा ऐसी सभी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी जाएं, जिनसे भारी वर्षा के दौरान आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न होने पाए। बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-प्रशासन प्रकाश चंद्र, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, सिंचाई विभाग, यूजेवीएनएल, केन्द्रीय जल आयोग, टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन, एनटीपीसी जोशीमठ, एनएचपीसी टनकपुर एवं धौलीगंगा, जीवीके अलकनंदा परियोजना, जेपी ग्रुप विष्णुप्रयाग तथा मौसम विज्ञान केन्द्र देहरादून के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

Loading

Leave A Reply

Your email address will not be published.