दून बासमती के पुनर्जीवन से किसानों में जगी नई उम्मीद, 75 हेक्टेयर में लहलहा रही फसल
-खेत से बाजार तक दून बासमती की मजबूत होगी पहुंच, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की मांग से जुड़ेंगे किसान
देहरादून। उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान रही दून बासमती के पुनर्जीवन की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। विकासनगर क्षेत्र के खेतों में लहलहा रही दून बासमती की फसल किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने विकासनगर ब्लॉक के जस्सोवाला, ढकरानी, हरबर्टपुर और फतेहपुर ग्रांट गांवों का भ्रमण कर दून बासमती की फसल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने फसल की स्थिति, गुणवत्ता और उत्पादन की संभावनाओं का जायजा लेने के साथ किसानों से सीधा संवाद कर खेती में आ रही समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं की जानकारी ली।
फसल कटाई से करीब एक माह पूर्व खेतों में पहुंचे सीडीओ ने फसल की प्रगति का आकलन किया। इस दौरान किसानों ने जैविक खेती में आ रही चुनौतियों, गुणवत्तापूर्ण बीज की समय पर उपलब्धता, फसल बीमा के दावों के निस्तारण में देरी तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जुड़ी समस्याएं उनके सामने रखीं।
सीडीओ ने कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कृषि गोष्ठियों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उनकी व्यावहारिक समस्याओं का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
कम लागत से खेती, बेहतर बाजार की मांग
जस्सोवाला गांव में आठ बीघा भूमि पर दून बासमती की खेती कर रहे किसान दिनेश गौड़ ने बताया कि इस किस्म की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आती है, जिससे किसानों का रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने दून बासमती का बेहतर मूल्य निर्धारित कर किसानों से उपज की खरीद सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई, ताकि उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल सके।
65 से बढ़कर 75 हेक्टेयर हुआ खेती का क्षेत्रफल
सीडीओ अभिनव शाह ने बताया कि दून बासमती के पुनर्जीवन के प्रयासों के तहत पिछले वर्ष 65 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती कराई गई थी। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के माध्यम से किसानों से सीधे उपज की खरीद की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसी उत्साहजनक अनुभव को देखते हुए इस वर्ष दून बासमती की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है।
उन्होंने बताया कि फसल कटाई से पूर्व स्थलीय निरीक्षण का उद्देश्य उत्पादन की स्थिति का आकलन करने के साथ किसानों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना है। रीप के माध्यम से दून बासमती की खरीद कर ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की मांग को पूरा करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार से जोड़ने के साथ उनकी उपज के बेहतर विपणन को बढ़ावा मिलेगा।
सीड बैंक बनाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान किसानों ने दून बासमती की उपज के उचित मूल्य और प्रमाणित बीज की उपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने रीप (ग्रामोत्थान) और कृषि विभाग के अधिकारियों को दून बासमती का मूल्य शीघ्र निर्धारित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रमाणित बीज की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सीड बैंक तैयार करने को कहा। सीडीओ ने स्पष्ट किया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जैविक खेती के प्रयासों का लिया जायजा
विकासनगर क्षेत्र के हरबर्टपुर में दून बासमती की खेती कर रहे किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने सीडीओ को अपने अमूल्य निधि ऑर्गेनिक फार्म का भ्रमण कराया। सीडीओ ने फार्म में संचालित जैविक खेती की गतिविधियों का जायजा लिया और विभिन्न उत्पादों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण की जानकारी ली।
उन्होंने फार्म में उत्पादित जैविक सब्जियों एवं अन्य उत्पादों का निरीक्षण किया। जैविक नर्सरी, जैविक कम्पोस्ट सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनाई जा रही जैविक कृषि पद्धतियों की भी उन्होंने सराहना की।
स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र राणा, खंड विकास अधिकारी विकासनगर सोनम गुप्ता, जिला परियोजना प्रबंधक अशोक चतुर्वेदी, प्रभारी अधिकारी वीबी-जी राम जी शक्ति प्रसाद भट्ट सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और किसान मौजूद रहे।