जैस्मिन सैंडलस ने लोक संवर्धन पर्व का किया भव्य समापन; हजारों दर्शकों ने लिया धमाकेदार संगीत संध्या का आनंद
-देहरादून में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के सात दिवसीय उत्सव का शानदार समापन*
देहरादून : छठे लोक संवर्धन पर्व का समापन शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में एक शानदार संगीतमय संध्या के साथ हुआ, जहाँ प्रसिद्ध पंजाबी गायिका एवं परफॉर्मर जैस्मिन सैंडलस ने अपने ऊर्जावान प्रदर्शन से सात दिवसीय समारोह का भव्य समापन किया। समापन सांस्कृतिक संध्या में हजारों उत्साही दर्शक शामिल हुए। यह आयोजन भारत की विविध पारंपरिक कलाओं, शिल्प, हथकरघा, क्षेत्रीय व्यंजनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव रहा। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम, उत्तराखण्ड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने देशभर के शिल्पकारों, कारीगरों, उद्यमियों, सांस्कृतिक कलाकारों और आगंतुकों को एक जीवंत मंच पर एक साथ लाया।
भव्य समापन संध्या का मुख्य आकर्षण जैस्मिन सैंडलस रहीं। अपनी दमदार आवाज, विशिष्ट संगीत शैली और जोशीली मंचीय उपस्थिति के साथ उन्होंने दर्शकों को पूरी शाम गाने, झूमने और उत्साह से भरने पर मजबूर कर दिया। दर्शकों से जुड़ते हुए जैस्मिन ने एक ऊर्जावान और जीवंत माहौल बनाया तथा अपने लोकप्रिय और हालिया चार्टबस्टर्स, जिनमें ‘धुरंधर – टाइटल ट्रैक’, ‘शरारत’, ‘जाइए सजना’, ‘धुरंधर: द रिवेंज – आरी आरी’, ‘मैं और तू’ और ‘वारी जावां’ शामिल हैं, के साथ-साथ ‘सिप सिप’ और ‘लावां’ जैसे लोकप्रिय फैन फेवरेट गीत भी प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति ने परेड ग्राउंड को संगीत और उत्साह से सराबोर कर दिया। हजारों प्रशंसक उनके लोकप्रिय गीतों के साथ गाते और उनकी ऊर्जा से कदम मिलाते नजर आए।
समापन संध्या के साथ सात दिवसीय यह समारोह संपन्न हुआ, जिसमें भारत की पारंपरिक कलाओं, शिल्प, हथकरघा, क्षेत्रीय व्यंजनों और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का व्यापक प्रदर्शन किया गया। महोत्सव में पारंपरिक कौशलों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया गया। शिल्पकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने तथा नए दर्शकों से जुड़ने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया गया। सात दिनों तक चले इस महोत्सव में बड़ी संख्या में आगंतुकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। देशभर से आए शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, गृह सज्जा सामग्री, काष्ठ शिल्प, पीतल शिल्प, टेराकोटा, बाँस उत्पाद, क्षेत्रीय व्यंजन तथा शिल्प निर्माण के सजीव प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। आगंतुकों की भारी उपस्थिति से शिल्पकारों, बुनकरों, उद्यमियों तथा फूड स्टॉल संचालकों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को नए व्यावसायिक अवसर, व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और ग्राहकों से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बताया। आगंतुकों ने भी पारंपरिक शिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और क्षेत्रीय स्वादों के अद्भुत संगम की सराहना करते हुए लोक संवर्धन पर्व को भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का उत्कृष्ट उत्सव बताया।