मैं वही नारी हूँ…”
– डॉ. प्रियंका सौरभ-चूल्हे की आँच में तपकर निखरी,बर्तनों की खनक में खोई थी,पर मन में रोशनी ही बिखरी।
आँगन तक सीमित थी दुनिया,फिर भी सपनों का विस्तार था,थकी हुई हर साँझ के पीछेएक नया ही उद्गार था।
झाड़ू की हर रेखा मेंमैंने जीवन लिख…