सरकारी जमीनों की मनमानी बिक्री का सवाल ही नहीं, रोजगार और राजस्व बढ़ाना लक्ष्य : आर. मीनाक्षी सुंदरम
-यूआईआईडीबी को लेकर भ्रामक प्रचार पर सरकार का पलटवार, अगले 2-3 माह में 6-7 चयनित भूमि खंडों की नीलामी की तैयारी
– हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश से 7-8 हजार प्रत्यक्ष और 10-15 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना, हर माह 300 करोड़ राजस्व का अनुमान
देहरादून। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) को लेकर विभिन्न स्तरों पर उठाए जा रहे सवालों और प्रचारित की जा रही भ्रामक जानकारियों पर सरकार ने कड़ा पलटवार किया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सरकारी भूमि की मनमानी बिक्री या परिसंपत्तियों का अनियंत्रित हस्तांतरण करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध और उत्पादक उपयोग कर निवेश, रोजगार तथा राजस्व में वृद्धि करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी के माध्यम से परिसंपत्ति मौद्रीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए कुछ चुनिंदा भूमि खंडों को चिह्नित किया गया है। इसके विपरीत बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को योजना में शामिल किए जाने का जो प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि इस विषय पर पूर्व में भी तथ्यों के साथ जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कई ऐसी जमीनों और परिसंपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है, जिनका वर्तमान प्रस्तावों से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में प्रदेश की जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
अगले दो-तीन माह में 6-7 भूमि खंडों की नीलामी की तैयारी
प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति देने और अर्थव्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से पूर्व में विस्तृत अध्ययन कराया गया था। इसमें सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग के माध्यम से नई आर्थिक गतिविधियां विकसित करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और राज्य के राजस्व में वृद्धि की संभावनाओं पर विचार किया गया।
उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत कुछ चुनिंदा भूमि खंडों को चिह्नित किया गया है। वर्तमान में इनकी संख्या सीमित है। आगामी दो से तीन माह के भीतर लगभग छह से सात चयनित भूमि खंडों की बोली प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संभावनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भूमि का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर पर अनुमोदन के बाद ही किया जाएगा।
आतिथ्य क्षेत्र में निवेश से रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और आरोग्य पर्यटन के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित आतिथ्य निवेश से लगभग सात से आठ हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, इससे जुड़ी सहायक आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से 10 से 15 हजार लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति का अनुमान भी व्यक्त किया गया है।
प्रमुख सचिव के अनुसार, यह पहल केवल भूमि के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, रोजगार, स्थानीय व्यापार और राज्य की राजस्व क्षमता को मजबूत बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
चौबटिया, धनोल्टी, आईडीपीएल और एचएमटी को लेकर स्थिति स्पष्ट
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने विभिन्न स्थानों की भूमि को लेकर किए जा रहे प्रचार पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कई ऐसी परिसंपत्तियों को वर्तमान योजना का हिस्सा बताया जा रहा है, जिनका वास्तविक प्रस्तावों से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने चौबटिया भूमि का उदाहरण देते हुए बताया कि इसकी व्यवहार्यता का परीक्षण किया गया था, लेकिन उपयुक्त संभावनाएं नहीं मिलने के कारण इसे प्रस्ताव से हटा दिया गया। इसी प्रकार धनोल्टी की भूमि के परीक्षण में वन भूमि होने की स्थिति सामने आई, जिसके चलते उसे भी प्रस्ताव से बाहर कर दिया गया।
इसके बावजूद इन दोनों स्थानों का उल्लेख इस तरह किया जा रहा है, मानो इन्हें वर्तमान योजना के तहत निवेश के लिए प्रस्तावित किया गया हो।
एचएमटी की भूमि के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भूमि सिडकुल के पास है और सिडकुल अपनी योजनाओं के अनुसार इस पर कार्य कर रहा है। इसका यूआईआईडीबी की वर्तमान प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
वहीं, ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की भूमि वन भूमि है और अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुई है। ऐसे में इस भूमि को यूआईआईडीबी की प्रस्तावित प्रक्रिया से जोड़कर प्रस्तुत करना तथ्यों के विपरीत है।
लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों को लेकर भी भ्रम
प्रमुख सचिव ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों को लेकर की जा रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इनमें से कई परिसंपत्तियों के संबंध में न तो मंत्रिमंडल की स्वीकृति प्राप्त हुई है और न ही यूआईआईडीबी बोर्ड की ओर से कोई अनुमोदन दिया गया है।
इसके बावजूद इन्हें प्रस्तावित योजनाओं का हिस्सा बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी भूमि अथवा परिसंपत्ति के संबंध में निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर पर अनुमोदन के बाद ही आगे बढ़ता है। इसलिए काल्पनिक जानकारियों को वास्तविक प्रस्तावों के साथ जोड़ना उचित नहीं है।
प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार देने की पहल
प्रमुख सचिव ने कहा कि इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। प्रदेश के अनेक युवा आतिथ्य और होटल प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक योग्यताएं प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड में ही आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का अवसर है, तो इन संभावनाओं को साकार करना प्रदेश के हित में है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने परिवार और समाज के बीच रहकर रोजगार मिले तथा उनकी प्रतिभा और प्रशिक्षण का लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था को प्राप्त हो, यही सरकार की प्राथमिकता है।
प्रमुख सचिव के अनुसार, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के विस्तार से केवल होटल और पर्यटन आवास तक आर्थिक गतिविधियां सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि स्थानीय किसानों, फल एवं सब्जी उत्पादकों, टैक्सी संचालकों, परिवहन व्यवसायियों, हस्तशिल्प कारीगरों, दुकानदारों, गृह आवास संचालकों और विभिन्न सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिलेगा।
इस प्रकार निवेश की एक परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों को मजबूती प्रदान कर सकती है।
राजस्व वृद्धि से विकास कार्यों को मिलेगी गति
प्रमुख सचिव ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से प्राप्त होने वाला राजस्व प्रदेश के विकास में उपयोग किया जाएगा। वस्तु एवं सेवा कर तथा अन्य माध्यमों से मिलने वाले राजस्व का उपयोग सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन सुविधाओं तथा सामाजिक क्षेत्र में निवेश के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए ऐसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिनसे राज्य को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हो। सरकारी भूमि का उपयोग यदि रोजगार, निवेश और राजस्व सृजन के लिए किया जा सकता है, तो उसका सकारात्मक और दूरदर्शी उपयोग प्रदेश के हित में है।
तथ्यों के आधार पर हो चर्चा
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दोहराया कि यूआईआईडीबी की पहल को लेकर वास्तविक तथ्यों को समझना आवश्यक है। कुछ चुनिंदा भूमि खंडों के आधार पर निवेश की संभावनाएं विकसित करने की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से व्यापक स्वरूप में प्रस्तुत करना और उन परिसंपत्तियों को भी इसमें शामिल बताना, जो प्रस्ताव का हिस्सा ही नहीं हैं, उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास प्रदेश के संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उत्तराखंड को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, निवेश को प्रोत्साहित करना, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और राजस्व में वृद्धि करना है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड के हित में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। राज्य के संसाधनों का उपयोग यहां के युवाओं, नागरिकों और प्रदेश के समग्र विकास के लिए हो, यही इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य है। इसलिए इस विषय पर चर्चा अपुष्ट जानकारियों और काल्पनिक दावों के बजाय तथ्यों तथा वास्तविक प्रस्तावों के आधार पर होनी चाहिए।