उत्तराखंड कौथिग में लोकगीतों की बही सुरों की बयार, प्रीतम भरतवाण और मीना राणा के गीतों पर झूमे लोग - चरित्र समाचार

उत्तराखंड कौथिग में लोकगीतों की बही सुरों की बयार, प्रीतम भरतवाण और मीना राणा के गीतों पर झूमे लोग

-भटवाड़ी के कलाकारों ने बसंत ऋतु पर आधारित लोक प्रस्तुतियों से जगाई पहाड़ की सांस्कृतिक स्मृतियां, स्वास्थ्य शिविर में 95 लोगों की जांच और 34 यूनिट रक्तदान

-शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और ग्राफिक एरा के चेयरमैन कमल घनशाला ने किया लोकगीत संध्या का शुभारंभ, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी की शिरकत

-अखिल गढ़वाल सभा के 75 वर्षों के सांस्कृतिक योगदान को अतिथियों ने सराहा, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संकल्प

देहरादून। रेंजर्स ग्राउंड में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिग-2026 में रविवार को लोकसंस्कृति, लोकपरंपराओं और पहाड़ के पारंपरिक संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से देर शाम तक चले कार्यक्रमों में जहां पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की यादें ताजा कीं, वहीं लोकगीत संध्या में प्रदेश के प्रसिद्ध लोकगायकों ने अपने गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम के प्रातःकालीन सत्र में सुबह 11 बजे भटवाड़ी से पहुंचे श्री गंगा कला मंच, गौरशाली के कलाकारों ने जगेंद्र शाह के नेतृत्व में बसंत ऋतु पर आधारित पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बसंत के आगमन, प्रकृति के नवजीवन और खेती-किसानी से जुड़ी लोकपरंपराओं को जीवंत किया गया। पहाड़ में बसंत के स्वागत और किसानों को खेती के लिए जागरूक करने वाली इन सांस्कृतिक परंपराओं ने दर्शकों को लोकजीवन की पुरानी स्मृतियों से जोड़ दिया।

शाम छह बजे आयोजित लोकगीत संध्या का शुभारंभ शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय एवं अस्पताल के चेयरमैन कमल घनशाला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अखिल गढ़वाल सभा पिछले 75 वर्षों से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

ग्राफिक एरा के चेयरमैन कमल घनशाला ने अखिल गढ़वाल सभा को हीरक जयंती की बधाई देते हुए कहा कि सभा ने लंबे समय से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कौथिग जैसे विराट सांस्कृतिक आयोजनों को सफल बनाने के लिए वह भविष्य में भी पूर्व की भांति सहयोग करते रहेंगे।

सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना और महासचिव गजेंद्र भंडारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि अखिल गढ़वाल सभा अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य को पुष्पित-पल्लवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कौथिग का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराना है।

प्रीतम भरतवाण के जागर से गूंजा पंडाल

लोकगीत संध्या की शुरुआत जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने अपने साथी ढोल वादकों के साथ नौबत और धुंयाल की पारंपरिक धुनों से की। उन्होंने इष्ट राजराजेश्वर एवं देवी भगवती के जागर के साथ पांडव जागर प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद अपने नए लोकप्रिय गीत ‘लाड़ी बेटुली’ की प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

लोकगायिका मीना राणा ने ‘हम उत्तराखंडी छौं’ गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ‘बलमा’ गीत से लोकसंगीत की रंगत बिखेरी। गायिका खुशी जोशी ने ‘तू रैंछि मैय्या ऊंचा पहाड़ों मा’ और ‘अल्मोड़ा अंग्रेज आयो टैक्सी में’ जैसे गीतों से खूब तालियां बटोरीं।

जौनसारी लोकगायक मनोज सागर ने ‘फूलों फूली आरओ’ और ‘घोटा सिमनिये’ प्रस्तुत कर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। वहीं विवेक नौटियाल ने ‘द्यो लागी तैं ऊंचा कैलासा’ और ‘ओटुवा बेलेना’ गीतों से पहाड़ी लोकसंगीत की छटा बिखेरी।

कार्यक्रम में एक बार फिर मंच पर पहुंचे प्रीतम भरतवाण ने अपने नए गीत ‘कैमरा, किमसाड़ी हाट मा’ और ‘सरूली मेरो जिया लगी गै’ के साथ ‘मोहन तेरी मुरली बाजी’ प्रस्तुत कर पूरे पंडाल को झूमने पर मजबूर कर दिया।

मीना राणा ने ‘मशकबीन’, ‘गुलबंद’, ‘लौंडा चंदरा’ और ‘ओ साहिबा’ जैसे लोकप्रिय गीतों से समां बांधा। खुशी जोशी ने ‘गोविंदी घुंघरू बजे दे छमछमा’ और ‘मैं घास काटूल’ गीतों के माध्यम से कुमाऊंनी लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। मनोज सागर ने ‘चांदीना की चौकी’ और ‘चुन्नू भाईजी’ गीतों से दर्शकों की तालियां बटोरीं। संध्या का समापन विवेक नौटियाल ने अपने लोकप्रिय गीत ‘रम्म झमा’, ‘रूप कु मंतर’ और ‘बांदिले तू ज्यूड़ी’ की प्रस्तुतियों से किया। देर शाम तक दर्शक लोकगीतों की धुनों पर झूमते रहे।

स्वास्थ्य शिविर में 95 लोगों की जांच, 34 यूनिट रक्तदान

कौथिग परिसर में सामाजिक सरोकारों के तहत स्वास्थ्य नेटवर्किंग सेवा संस्थान की ओर से सुबह 10:30 बजे से निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। वहीं उत्तराखंड ब्लड सेंटर और अरिहंत अस्पताल के सहयोग से रक्तदान शिविर भी लगाया गया। रक्तदान शिविर में 34 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जबकि स्वास्थ्य जांच शिविर में 95 लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई।

शिविर में डॉ. एसपी भट्ट, डॉ. श्रीनंद उनियाल, डॉ. एमपी मैठाणी, एनएस नेगी, राहुल, अरुण, प्रशांत, आभा शर्मा और रचना चोपड़ा सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी कौथिग में प्रतिभाग करते हुए आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमारी लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएं हमारी पहचान हैं। इनका संरक्षण करना और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अखिल गढ़वाल सभा कौथिग जैसे आयोजनों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का सराहनीय कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के साथ युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।

कार्यक्रम में सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट, महासचिव गजेंद्र भंडारी, उदय शंकर, वीरेंद्र असवाल, सूर्य प्रसाद भट्ट, अजय जोशी, मोहन सिंह खत्री सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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