राज्य के पर्वतीय क्षेत्र के गांवों में संचार सुविधा का अभाव एक गंभीर समस्या

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के गांवों में संचार सुविधा का अभाव एक गंभीर समस्या है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों के कारण आज भी सैकड़ों गांवों में मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट नहीं है। इस डिजिटल युग में कनेक्टिविटी की यह कमी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्रभावित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों से तेजी से पलायन हो रहा है। राज्य के लगभग 845 गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कनेक्टिविटी के अभाव के कारण ग्रामीणों को आपातकालीन सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नेटवर्क न होने के कारण आपात स्थिति में एम्बुलेंस या पुलिस से संपर्क साधना असंभव हो जाता है। डिजिटल डिवाइड के कारण बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई ठप हो जाती है। कई क्षेत्रों में छात्रों को सिग्नल के लिए मीलों पैदल चलकर पहाड़ियों और पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है।
ग्रामीण और दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में संचार और मोबाइल कनेक्टिविटी एक गंभीर चुनौती है। संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में स्थानीय लोग शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। कनेक्टिविटी की कमी के मुख्य कारणों में राज्य की जटिल और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी बनावट के कारण टावर लगाना और सिग्नल पहुंचाना बेहद मुश्किल है। दूरस्थ क्षेत्र पुरोला, भिलंगना और ओखलकांडा ब्लॉक के कई सुदूरवर्ती गांव आज भी मुख्य संचार सुविधाओं से वंचित हैं।
नेटवर्क न होने से ग्रामीणों, छात्रों और कारोबारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी कॉल के लिए लोगों को पहाड़ियों पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। नेटवर्क की कमी से न केवल छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि 108 एंबुलेंस सेवा, पुलिस, फायर सर्विस और जिला प्रशासन से संपर्क करने में भी लोगों को भारी दिक्कतें आती हैं।
नेटवर्क कनेक्शन की दिक्कत से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए एबुलेंस चालक तक से संपर्क होना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस के इंतजार में गर्भवती को प्रसव पीड़ा से जूझना पड़ता है। लोगों को आनलाइन पेमेंट से लेकर फोन से बातचीत करने में परेशानी होती है। कई जगह बीएसएनएल के टावर तो लगे हैं, लेकिन फाइबर कनेक्शन न होने से नेटवर्क काम नहीं करता। सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के लिए सैटेलाइट फोन और वीसैट तकनीकों का उपयोग किया जाना एक कारगर विकल्प हो सकता है।
लोगों को अपने परिजनों से बात करनी हो, युवाओं को रोजगार से संबंधित जानकारियां प्राप्त करनी हो, छात्र-छात्राओं को शिक्षा से संबंधित पठन पाठन सर्च करनी हो अथवा किसी जरूरतमंद को सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सूचनाएं एकत्र करनी हो, सभी के लिए इंटरनेट तक सुलभ पहुंच जरूरी है। जिसे चलाने के लिए नेटवर्क की सुविधा का होना आवश्यक है, जिसका गांवों में नितांत अभाव है।
एक ओर जहां शहर तेजी से विकसित हो रहे हंै वहीं दूरदराज ग्रामीण इलाके आज भी विकास की लौ से बहुत दूर है। कई ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां लोगों को मामूली नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन्हें इंटरनेट स्पीड मिलना तो दूर की बात है, अपनों से फोन पर भी बात करने के लिए गांव से कई किमी दूर चलकर नेटवर्क एरिया में आना पड़ता है।