“तेरी माया” फिल्म पहाड़ की आत्मा, रिश्तों की गरिमा और मातृभूमि प्रेम का सशक्त प्रतिबिंब

देहरादून, वीरेंद्र सिंह भंडारी। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत करती फिल्म “तेरी माया” केवल एक चलचित्र नहीं, बल्कि पहाड़ की आत्मा, रिश्तों की गरिमा और मातृभूमि के प्रेम का सशक्त प्रतिबिंब है। निर्देशक संजय सिंह नेगी ने अपनी लेखनी और निर्देशन के माध्यम से जिस भावनात्मक गहराई के साथ उत्तराखंड की संस्कृति को पर्दे पर उतारा है, वह वास्तव में सराहनीय और प्रेरणादायक है।
आज जब क्षेत्रीय सिनेमा आधुनिकता की दौड़ में अपनी मौलिकता खोता जा रहा है, ऐसे समय में “तेरी माया” जैसी फिल्में हमारी जड़ों, बोली, लोकजीवन और पारिवारिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। यह फिल्म दर्शकों के हृदय को केवल मनोरंजन से नहीं, बल्कि संवेदनाओं, अपनत्व और पहाड़ी संस्कृति के आत्मीय स्पर्श से जोड़ती है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी, भावनात्मक प्रस्तुति और उत्तराखंड की संस्कृति के प्रति समर्पण है। इसमें कलाकारों का अभिनय, गीत-संगीत तथा संवाद सभी इतने जीवंत हैं कि दर्शक स्वयं को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते हैं। यह फिल्म निश्चित रूप से उत्तराखंडी सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। मैं हृदय से निर्देशक संजय सिंह नेगी, समस्त कलाकारों, तकनीकी टीम एवं फिल्म से जुड़े प्रत्येक सहयोगी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

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