65 देशों के लोग जुटे
देहरादून। वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे युद्ध और संघर्षों के कारण उत्पन्न अस्थिरता, तनाव एवं वैश्विक अशांति के बीच विश्व शांति, मानवीय मूल्यों और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लेखक गाँव, सृजनी ग्लोबल एवं VHSS वैश्विक हिन्दीशाला संस्थान (यूरोप) के संयुक्त तत्वावधान में “एक शाम : विश्व शांति के नाम” शीर्षक से एक भव्य ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
यह संगोष्ठी लेखक गाँव के “वेद एवं विश्व शांति अभियान” के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य वर्तमान युद्धग्रस्त परिस्थितियों में संवाद, साहित्य और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से शांति का मार्ग प्रशस्त करना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने की। कार्यक्रम का संरक्षण विदुषी निशंक (निदेशक, लेखक गाँव) द्वारा किया गया तथा इसका कुशल संयोजन जर्मनी से डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना (संस्थापक: सृजनी एवं VHSS यूरोप) ने किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. निशंक ने कहा कि आज जब विश्व के कई हिस्सों में युद्ध के कारण अशांति और उथल-पुथल का वातावरण है, तब “विश्व शांति” की अवधारणा और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक धरोहर “वसुधैव कुटुंबकम” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदैव से विश्व को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता रहा है और वर्तमान समय में पूरा विश्व आशा के साथ भारत की ओर देख रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि शब्दों में अपार शक्ति निहित होती है—“शब्द ब्रह्म” है। एक सकारात्मक और सार्थक शब्द भी समाज और विश्व में परिवर्तन की दिशा तय कर सकता है। साहित्यकारों और रचनाकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने सृजन के माध्यम से शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त करें।
डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि युद्ध कभी भी स्थायी समाधान नहीं देते, बल्कि वे केवल विनाश, पीड़ा और असंतुलन को जन्म देते हैं। उन्होंने साहित्य को परिवर्तन का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि आज आवश्यकता है कि वैश्विक विमर्श का केंद्र युद्ध नहीं, बल्कि शांति, संवाद और सहयोग हो।
इस संगोष्ठी में 65 से अधिक देशों के प्रतिभागियों एवं दर्शकों ने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहभागिता की। देश-विदेश के नवोदित प्रतिभाशाली बच्चों, युवा रचनाकारों तथा वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकारों ने अपने विचारों, अनुभवों और रचनाओं के माध्यम से वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर गंभीर और संवेदनशील चिंतन प्रस्तुत किया।
विशेष रूप से युवा रचनाकारों ने डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की देशभक्ति एवं मानवीय मूल्यों से प्रेरित कविताओं का भावपूर्ण काव्य पाठ एवं गुनगुनाते हुए प्रस्तुतीकरण किया, जिसने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की और श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
नवोदित प्रतिभागियों में श्रेया चुग, साक्षी गुप्ता, भव्या भगत, कविशा वर्मा, श्रेयल पटनायक, लव्या कुशवाहा, इंदु पार्सवान, अनुष्का ठाकुर, वंशिका नेगी, आयुषी ज्वाल, चैतन्य, वृंदा वाणी, सीरत अरोड़ा, प्रनवी भारद्वाज एवं सार्थक चमोली ने अपने सशक्त काव्य पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. बेचैन कंडियाल के प्रभावशाली स्वागत उद्बोधन से हुआ। संचालन डॉ. शिप्रा सक्सेना एवं आशना कंडियाल नेगी द्वारा अत्यंत सजीव एवं प्रभावपूर्ण ढंग से किया गया। कार्यक्रम की संकल्पना में पूजा पोखरियाल का विशेष योगदान रहा। अंत में श्रीमती मोनिका शर्मा ने सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह संगोष्ठी न केवल एक साहित्यिक आयोजन रही, बल्कि वर्तमान युद्ध की परिस्थितियों के बीच विश्व शांति के लिए सामूहिक चिंतन, संवेदनशील अभिव्यक्ति और सकारात्मक पहल का एक सशक्त उदाहरण भी बनी। “वेद एवं विश्व शांति अभियान” के अन्तर्गत लेखक गाँव द्वारा किया गया यह प्रयास वैश्विक स्तर पर शांति, संवाद और मानवीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।