शहीदी समर्पण को नमन : निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी में “निर्वाण कीर्तन दरबार” का भव्य आयोजन

ऋषिकेश- आज निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी में नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, भाई सती दास जी, भाई मती दास जी एवं भाई दियाला जी के 350वें शहीदी साके को समर्पित “निर्वाण कीर्तन दरबार” का भव्य एवं भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम निर्मल आश्रम के संस्थापक महंत बाबा राम सिंह जी महाराज के पावन आशीर्वाद तथा संरक्षक संत जोध सिंह जी महाराज जी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा जी (अध्यक्ष, गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन समिति) एवं विशिष्ट अतिथि शास्त्रीय और गुरमत संगीत के विख्यात विद्वान डॉ. अलंकार सिंह जी (मुखिया, गुरमत संगीत चेयर, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला) रहे। इनके साथ अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और भव्य बनाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत-सम्मान, दीप प्रज्ज्वलन, मूल मंत्र एवं गायत्री मंत्र के साथ हुआ। कक्षा 11 की छात्रा गुरनीत कौर ने गुरु साहिबान के पावन बलिदानों एवं मानवता, धर्म और सत्य की रक्षा के लिए किए गए त्याग का उल्लेख करते हुए मार्मिक भाषण प्रस्तुत किया।

एनजीए एवं एनडीएस के विद्यार्थियों द्वारा शहीदों की स्मृति में भावपूर्ण शब्द कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात डॉ. अलंकार सिंह जी, संदीप सिंह जी, नरेंद्र पाल सिंह जी तथा श्री जगजीत सिंह जी ने गुरु तेग बहादुर जी द्वारा उच्चरित 57 श्लोक एवं रागबद्ध शब्दों का अद्वितीय प्रभावशाली कीर्तन प्रस्तुत कर समस्त वातावरण को आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत कर दिया। कार्यक्रम से पूर्व विद्यार्थियों के लिए डॉ. साहब द्वारा विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की गई।

समापन अवसर पर एनजीए की प्रधानाचार्या डॉ. सुनीता शर्मा एवं हेडमिस्ट्रेस श्रीमती अमृत पाल डंग जी ने संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्य अतिथियों का हृदय से आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया। महाराज श्री द्वारा सभी अतिथियों को शिरोपा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा जी ने अपने संबोधन में कार्यक्रम एवं संस्था की उत्कृष्ट गतिविधियों की सराहना करते हुए आयोजकों को बधाई दी।

कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री सरबजीत कौर द्वारा किया गया।

इस अवसर पर सरदार दलजीत सिंह, स्वामी दयानंद मूर्ति, महंत गुरविंदर सिंह, जगदीश लाल पाहवा, रविंदर सिंह बिंद्रा, इकबाल जी, डॉ. एस.एन. सूरी, श्रीमती रेनू सूरी, डॉ. कुलविंदर, सरदार बलबीर सिंह, गुरबख्श रतन सिंह, मनजीत सिंह, ओंकार सिंह सहित अन्य साज-संगत उपस्थित रही।

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