दून पुस्तक महोत्सव 4 अप्रैल से देहरादून में
-नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में गढ़वाली, कुमाऊँनी सहित कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी
देहरादून। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वाधान में 4 से 12 अप्रैल तक देहरादून के परेड ग्राउंड में दून पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ’दून पुस्तक महोत्सव 2026’ की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि ‘दून पुस्तक महोत्सव’, पुस्तकों, विचारों और संस्कृति के एक अनूठे संगम के रूप में पूरे देश के पाठकों, लेखकों और कलाकारों को एक मंच पर लाएगा।
इस महोत्सव का उद्घाटन 4 अप्रैल को सुबह 10ः30 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात विद्वान आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में गढ़वाली और कुमाऊँनी सहित कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी, जो इसे पुस्तक प्रेमियों के लिए स्वर्ग बना देंगी। इस महोत्सव में प्रवेश निःशुल्क है। इसका उद्देश्य पढ़ने की आदतों को बढ़ावा देना और साहित्य को व्यापक जनसमुदाय के लिए सुलभ बनाना है। पुस्तकों के अलावा, दून पुस्तक महोत्सव 2026 में बच्चों के लिए प्रतिदिन रोचक गतिविधियाँ होंगी, जिनमें स्टोरी टेलिंग सत्र, रचनात्मक कार्यशालाएँ, क्विज़ और इंटरैक्टिव सीखने के अनुभव शामिल हैं। इस महोत्सव में कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और म्यूजिकल कॉन्सर्ट भी होंगे, जो एक जीवंत और उत्सव जैसा माहौल बनाएंगे।
इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘दून साहित्य उत्सव’ है, जहाँ जाने-माने लेखक, फिल्मकार, विचारक और जानी-मानी हस्तियाँ पैनल चर्चाओं और इंटरैक्टिव सत्रों के ज़रिए पाठकों से जुड़ेंगी। नितिन सेठ, इम्तियाज़ अली, अखिलेश मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला, ब्रिगेडियर सुशील तंवर, संजीव चोपड़ा, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसी जानी-मानी हस्तियाँ विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगी। वक्ता सिनेमा और साहित्य, दून घाटी से महिलाओं की आवाज़, वर्दी में नेतृत्व और साहस, भारत के अतीत में देशभक्ति और क्रांति, इंसान और मशीन के बदलते रिश्ते, और 1946 के नौसेना विद्रोह एवं सुभाष चंद्र बोस की विरासत जैसे ऐतिहासिक विषयों पर चर्चा करेंगे।
साहित्यिक जुड़ाव को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले साल, इसने एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया था, जिसमें उत्तराखंड के लेखक, अनुवादक और भाषा विशेषज्ञ एक साथ आए थे।
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