दून पुस्तक महोत्सव के सातवें दिन चिल्ड्रन कॉर्नर का माहौल उत्साह और रचनात्मकता से भरपूर रहा, 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया

– “फूल देई” इलस्ट्रेशन वर्कशॉप में बच्चों ने पारंपरिक पर्व को चित्रों में उकेरा

– “क्वेश्चन टू क्रिएशन” सत्र में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से परिचय कराया गया, जहां बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया

– दिन का समापन एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें वंशिका जोशी ने पंजाबी, पहाड़ी और बॉलीवुड गीतों की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं

देहरादून: दून पुस्तक महोत्सव के सातवें दिन शुक्रवार को चिल्ड्रन कॉर्नर का माहौल उत्साह और रचनात्मकता से भरपूर रहा, जिसमें 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्वाति गोयल के म्यूजिकल स्टोरीटेलिंग सत्र ने बच्चों को कहानियों की दुनिया में पहुंचाया, जबकि “गंगा – द क्रैडल ऑफ लाइफ” कार्यशाला में डॉ. संगीता अंगोम ने जलीय जीवों के महत्व को रोचक तरीके से समझाया। मुकेश नौटियाल की “फूल देई” इलस्ट्रेशन वर्कशॉप में बच्चों ने पारंपरिक पर्व को चित्रों में उकेरा। “क्वेश्चन टू क्रिएशन” सत्र में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से परिचय कराया गया, जहां बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। दिन का समापन सुभाष रावत के “आर्ट्स-इंटीग्रेटेड लर्निंग” सत्र के साथ हुआ। ऐपन आर्ट कॉर्नर और अन्य गतिविधियों ने पूरे दिन माहौल को जीवंत बनाए रखा।

दून लिट फेस्ट में पहले साहित्यिक सत्र में वैभव पुरंदरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक, विनायक दामोदर सावरकर पर आधारित अपनी पुस्तकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत के वीर नायकों के बारें में लोगों को विस्तृत जानकारी नहीं है। यदि हमें अपने नायकों के बारे में जानना है तो अधिक से अधिक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, एक विशेष संवाद सत्र में कर्नल अजय रैना ने ब्रिगेडियर सुशील तनवर से उनकी पुस्तक “अमन के फरिश्ते” पर चर्चा की। यह पुस्तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और सुरक्षाबलों के संघर्ष पर आधारित है।  ‘मुखबिर’ उनकी पहली किताब थी जो कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। ‘अमन के फ़रिश्ते’ ब्रिगेडियर तंवर की दूसरी किताब है। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया, ‘इस पुस्तक की मुख्य विशेष वस्तु जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से मुकाबला और खुफिया जानकारी का महत्व है।’ यह एक रोमांचक सैन्य उपन्यास है, जिसमें सेना के जवान आशीष और अब्दुल हमीद की कहानी है।

दिन का समापन एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें वंशिका जोशी ने पंजाबी, पहाड़ी और बॉलीवुड गीतों की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी बहुरंगी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे माहौल को उत्साह और आनंद से भरते हुए सभी को एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया।
दून पुस्तक महोत्सव में कल का दिन बाल मंडप, साहित्यिक सत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ बेहद उत्साहपूर्ण और ज्ञानवर्धक रहेगा। बाल मंडप में आयोजित स्टोरीटेलिंग सत्र में सुभाष रावत बच्चों को रोचक कहानियों के माध्यम से कल्पना और सीख की एक नई दुनिया से परिचित कराएंगे। इसके साथ ही “मैजिक ऑफ वॉइस” विषय पर वॉइसओवर वर्कशॉप में हिम्मत सिंह नेगी अपनी आवाज़ के माध्यम से बच्चों को अभिव्यक्ति, उच्चारण और वॉइस मॉड्यूलेशन की बारीकियाँ सिखाएंगे। वहीं, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय द्वारा आयोजित “डिजिटल इंडिया” विषय पर ड्रॉइंग प्रतियोगिता में बच्चे अपनी रचनात्मकता और तकनीकी समझ का प्रदर्शन करेंगे।
साहित्यिक सत्रों में ‘Smarter Machines, Wiser Humans’ विषय पर नितिन सेठ आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव बुद्धिमत्ता के संतुलन पर विचार साझा करेंगे, जिससे श्रोताओं को भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों पर सोचने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा साधना बलवटे के साथ आयोजित पुस्तक परिचर्चा में साहित्य के विविध पहलुओं पर सार्थक संवाद होगा, जो पाठकों और लेखकों के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित करेगा। दिन का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में होगा, जिसमें करिश्मा शाह की मनमोहक प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगी और पूरे वातावरण को संगीत और उल्लास से भर देगी।

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